देश के अधिकतर हिस्सों में गेहूं की बुवाई का काम शुरू हो चुका है या फिर समाप्त की तरफ बढ़ रहा है। बहुत से किसानों के द्वारा अब गेहूं फसल में पहली सिंचाई का काम शुरू हो चुका है। Gehu Fasal Me Zinc से किसानों को किसी भी फसल में बेहतर पैदावार तभी मिल सकती है जब उनको फसल व जमीन के मुताबिक सही बीज व खाद, बीज पानी पर्याप्त रूप से दिया जाए। आज हम आपको गेहूं की फसल में जिंक का प्रयोग और यह गेहूं फसल के लिए कितनी जरूरी होता है।
Gehu Fasal Me Zinc के लाभ
गेहूं की फसल में वैसे तो सभी तरह की उर्वरक की जरूरत लेकिन जिंक का प्रयोग करने से गेहूं का पौधे में बढ़वार, पौधे में हरा करने व कल्लों में फुटाव में बढ़ोतरी होती है। गेहूं की फसल में जिंक की मात्रा में कमी होने से पौधों का बढ़वार सही से नहीं होता और पत्तियां समानांतर पीली पड़ हो जाती है।
जिंक का प्रयोग गेहूं फसल में कब करना चाहिए
किसान अगर गेहूं में जिंक का प्रयोग बुवाई करने के दौरान किया जाए तो सबसे अच्छा लाभ मिलेगा। लेकिन जो भी किसान अगर बुवाई के समय पर जिंक का प्रयोग न करते हैं तो फिर इस स्थिति में वे जब पहली सिंचाई करते समय कर सकते हैं। जिसमें किसान 6 किलोग्राम की मात्रा 33% या फिर इसके अलावा 10 किलोग्राम 21% जिंक को एक एकड़ में यूरिया के साथ सम्मान रूप में मिलाकर डाला जा सकता है।
कब और कैसे कैसे करें जिंक का प्रयोग
किसान भाई गेहूं की खेती में जिंक का प्रयोग 3 तरह से किया जा सकता है जो निम्नलिखित नीचे दिया गया है –
1). प्रति एकड़ में यूरिया के साथ 6 किलोग्राम 33% या 10 किलोग्राम 21% जिंक डालें
2). स्प्रे के द्वारा प्रति एकड़ जमीन में 200 लीटर पानी के साथ 33% जिंक 800 ग्राम को अच्छे से मिलाकर डाला जा सकता है।
3). इसके अलावा किसान प्रति एकड़ जमीन में 150 ग्राम मात्रा में चेल्टेड जिंक का प्रयोग किया जा सकता है।
नोट – हमारी जानकारी किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए गेहूं में जिंक का प्रयोग करने के बारे में बताया गया है। ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग व कृषि विशेषज्ञों के सलाह ले सकते हैं।
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